दवात की स्याही - अकबर बीरबल की कहानी

दवात की स्याही - अकबर बीरबल की कहानी

Apr 16,2021 09:51 AM posted by Admin

एक बार एक गांव में एक व्यापारी रहता था। उसकी पत्नी बेहद खबसरत की सन्दरता के सामने चन्द्रमा भी फीका लगता था। एक बार पारी और उसकी पत्नी अपने सगे-सम्बन्धी से मिलने किसी दसरे गांव जा रहे जा रहे थे। सफर अधिक दूर का नहीं था, इसलिए वे दोनों पैदल न दिए थे। रास्ते में एक किसान, जो अपनी गाड़ी पर सवार था, त में व्यापारी की पत्नी के प्रति पाप समा गया। उसने व्यापारी से“सेठ जी! आप किस गांव में जाएंगे?" व्यापारी ने गांव का नाम दिया। किसान गांव का नाम सुनकर बोला-"मैं भी उसी गांव में जा रहा है।

आप अपनी पत्नी को मेरी गाड़ी में बिठा दें।" इस तरह व्यापारी अपनी पत्नी को गाड़ी में बिठाकर खुद पैदल चल दिया। किसान ने गाड़ी में जुते बैलों को तेज़-तेज़ दौड़ाना शुरू कर दिया। व्यापारी गाड़ी के पीछे-पीछे भागने लगा। रास्ते में किसान ने उसकी पत्नी को तरह-तरह के सब्जबाग दिखाकर अपने वश में कर लिया। - इधर जब वे उस गांव के निकट पहुंचे तो व्यापारी ने किसान को आवाज़ दी-"भाई! ठहर जाओ, हमारा गांव आ गया है, यहां मेरी पत्नी को उतार तब किसान ने उत्तर दिया, "भाई! हमारा गांव तो आगे है और यह स्त्री मेरी पत्नी है।"

यह सुनकर व्यापारी दौड़कर गाड़ी के पास पहुंचा और ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने लगा कि यह गाड़ी वाला मेरी पत्नी को नहीं उतार रहा है। उसकी बात सुनकर आस-पास के राहगीर खड़े हो गए, लेकिन कोई फैसला नहीं कर सके कि वह स्त्री किसकी पत्नी है। इसलिए वे दोनों अकबर बादशाह के दरबार में पहुंचे।  अब अकबर बादशाह ने उन दोनों की बातें सुनकर बीरबल से उसका फसला करने के लिए कहा। तब बीरबल ने उस स्त्री को अपने पास बुलाया आर उससे पूछा-"क्या बात है?" औरत चुप रही, वह कुछ नहीं बोली। पारबल चक्कर में पड़ गया। थोडी देर सोचने के बाद उसने उस औरत स्याही की दवात देकर कहा-"इसमें पानी डालकर ले आओ।"

यह सुनकर औरत उठी और दवात में पानी डालकर ले आई। बीरबल ने दवात से स्याही लेकर एक कागज़ पर दो-चार शब्द लिखकर में पानी सही था, इसलिए उसने व्यापारी से कहा-"तुम अपनी पर ले जाओ, यह स्त्री तुम्हारी है।"इस तरह बीरबल ने किसान को झूठ बोलने और गलत आचरण कर पर सज़ा दी। यह देखकर अकबर बादशाह ने बीरबल से पूछा-" यह कैसे जाना कि औरत व्यापारी की है?"बीरबल बोला-"मैंने उस औरत से दवात में पानी डालने को कहा। उसने उतना ही पानी डाला, जितना स्याही के लिए ठीक था। इससे मैं इस निश्चय पर पहुंचा कि वह औरत किसान की पत्नी नहीं है।

व्यापारी कभी-कभी इससे स्याही में पानी अवश्य डलवाता होगा। उसे स्याही में पानी डालने की आदत थी, अतः सही पानी डालकर ही लाई। यदि वह किसान की स्त्री होती तो अनजानेपन में कम या अधिक मात्रा में पानी भर लाती।" अकबर बादशाह बीरबल के इस न्याय की दाद दिए बिना न रह सके।