बीरबल ने पकड़ा रूई चोर-अकबर बीरबल की कहानी

बीरबल ने पकड़ा रूई चोर-अकबर बीरबल की कहानी

Apr 16,2021 08:06 AM posted by Admin

एक बार अकबर बादशाह ने देशी कारीगरों की तरक्की करने के उद्देश्य से बहुत-सी रूई इकट्ठी करवाई। इकट्ठी की गई रूई गरीब कारीगरों में बांट दी जाती थी। वे उसे बड़े परिश्रम से कातते थे और सूत कातकर अकबर बादशाह के यहां पहुंचा देते थे। इस कार्य से उनकी जीविका चलती थी। इससे अकबर बादशाह को भी बहुत लाभ होता था। रूई का भंडारण अकबर बादशाह के लिए आवश्यक था, क्योंकि कारीगरों की इतनी औकात नहीं थी कि वे रूई खरीद सकते। रूई का सालाना हिसाब निकाला गया तो उसमें भारी कमी पाई गई। अकबर बादशाह को इसका पता लगा। उन्होंने राज्य के बड़े-बड़े कर्मचारियों को इसकी जांच के लिए नियुक्त किया। अब पुराने तौर-तरीके छोड़कर हर माह की आमदनी व खर्च का हिसाब-किताब होने लगा था,

फिर भी महीने के अंत में रूई कम पड़ जाती थी। अगले दिन अकबर बादशाह के मन में आया कि हटाओ यह बखेड़ा। इस तरह नुक्सान उठाकर कितने दिन काम चलेगा। रूई का धंधा बन्द करने का आदेश जारी कर दिया गया। बीरबल को जब यह बात मालूम हुई तो उसने विचार किया कि इससे तो बहुत से गरीबों की रोज़ी मारी जाएगी, फिर उनकी ज़िन्दगी कैसे बसर होगी? यह सोचकर स्वयं इसकी जांच करनी आरम्भ कर दी। वह अकबर बादशाह के पास गया और बोला-"हुजूर! मैं रूई-चोरों को पकड़ना चाहता हूं।"बीरबल की इस बात से अकबर बादशाह अत्यधिक खुश हुए। उन्होंने बीरबल को इसकी आज्ञा दे दी। बाहर से जिन दलालों के मार्फत रूई आती थी, वे सब आपस में मिलकर चोरी करते थे, पर यह बात और लोग नहीं जानते थे। यही कारण था कि जांच-पड़ताल का कोई नतीजा नहीं निकला।

बीरबल के ध्यान में यह बात आई कि अवश्य ही इसमें कुछ चाल है, नहीं तो इस तरह रूई का घटना कदापि संभव नहीं था। खूब सोच-विचार कर बीरबल ने सब दलालों को दरबार में बुलाया। रूई का व्यवसाय बन्द करने की घोषणा सुनकर दलाल चिंतित थे, क्योंकि इससे उनको दोतरफा फायदा होता था। बीरबल के एकाएक बुलाने से उनको कुछ संतोष हुआ कि शायद पुनः व्यवसाय चलाने का इरादा हो, इसलिए राय-मश्विरे के लिए उन्हें बुलाया गया है।

दसरे दिन दरबार में सभी दलाल जमा हुए यथासमय सब दरबारी भी आ पहुंचे। दरबार का कार्य आरम्भ हो गया। बीरबल ने दलालों को संबोधित कर रूई के व्यवसाय का ब्यौरा सुनाते हुए कहा-"रूई के से बहत नुक्सान हो रहा है और चोर छिपे तौर पर तो हो हैं. खुलेआम भी अपनी पगड़ी में कुछ-न-कुछ रूई ठंसर मैं उन्हें अच्छी तरह पहचानता हूं, फिर भी मैं आम सभा में न नहीं करना चाहता और उनका नाम भी ज़ाहिर करना नहीं जाबीरबल की यह घुमा-फिराव की बातें चोर-दलालों ने समय ज्ञात हो गया कि बीरबल बड़े ही चतुर हैं और उनकी बातों का पता नहीं लग गया है। अब वह अवश्य ही उनका भंडाफोड़ कर देंगे।
साथ ही पगड़ी में रूई ढूंसने की बात से चोरों का मन घबराने लगा। वे परस्पर एक-दूसरे से इशारे में कहने लगे कि कहीं उनकी पगडी में सचमुच ही रूई तो नहीं चिपकी है?

उनमें से एक साथी से न रहा गया। उसने सबसे नज़र बचाकर अपनी पगड़ी को ठीक करने के बहाने टटोला। बीरबल की तेज़ दृष्टि सब पर थी। उन्होंने समझ लिया कि यही रूई का चोर है। उन्होंने तत्काल ही सिपाही को उस चोर की मरम्मत करने का हुक्म दिया। भयभीत होकर उस आदमी ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया।बीरबल ने चतुराई से उसके सभी चोर हिस्सेदारों का भी नाम पूछ लिया। सभी पुराने दलाल निकाल दिए गए और चोरी करने वालों को दण्ड दिया गया। बादशाह अकबर बीरबल की चतुराई पर फूले नहीं समाए.