बीरबल ने बचाई कारीगर की जान-अकबर बीरबल की कहानी

बीरबल ने बचाई कारीगर की जान-अकबर बीरबल की कहानी

Apr 16,2021 09:07 AM posted by Admin

एक बार की बात है अकबर बादशाह ने एक कारीगर को बख्तरबंद (लोहे का वस्त्र), जिसे फौजी युद्ध के अवसर पर धारण करते हैं, बनाने का आदेश दिया। राजा के आदेशानुसार कुछ दिन पश्चात् कारीगर ने बख्तरबंद तैयार करके बादशाह के सामने हाज़िर कर दिया। इसे बनाने में कारीगर ने कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी थी। अकबर बादशाह को वह बख्तरबंद बहुत पसन्द आया, लेकिन दूसर ही क्षण उन्हें उसकी मजबूती पर शक होने लगा। उन्होंने वह वस्त्र एक काठ के पुतले को पहनाने की आज्ञा दी और तलवार लेकर स्वयं उसकी मजबूती की परीक्षा के लिए आगे बढ़े। जैसे ही अकबर ने उस बख्तरबंद पर प्रहार किया, वह एक बार में ही फट गया।यह देखकर बादशाह क्रोधित होकर बोले-"इतना कमज़ोर बख्तर...अरे मूर्ख! यदि हम इसे बिना परखे पहनकर किसी युद्ध में चले जाते तो इससे क्या बचाव होता? जाओ,

दूसरा मजबूत बख्तर बनाकर लाओ। मगर याद रहे, अगर वह भी इसी तरह कमज़ोर हुआ तो तुम्हारी गर्दन उड़ा दी जाएगी।"अकबर बादशाह का क्रोधपूर्ण हुक्म सुनकर कारीगर भयभीत हो गया, किन्तु करता क्या? वह अकबर बादशाह को अदब से सलाम करके अपने घर वापस लौट आया। उसका उतरा चेहरा देखकर उसकी पत्नी ने इसका कारण पूछा। तब कारीगर ने अकबर बादशाह की आज्ञा की सारी बातें बताते हुए कहा-"अब मेरी जान बचनी कठिन है।"उसकी पत्नी बहुत चतुर थी, कहने लगी-"मर्द होकर ज़रा-सी बात पर भयभीत होते हो। बीरबल के पास जाकर बचने का कोई उपाय क्यों नहीं पूछते?"

मुझे आशा है वह उपाय सुझाएंगे।इस प्रकार पत्नी की बात से प्रोत्साहित होकर कारीगर बीरबल के पास गया और सारी बातें बताकर प्राण-दान की प्रार्थना की।तब बीरबल ने उसे ढांढस बंधाते हुए कहा-"बख्तर बनाकर ले जाओ। जब अकबर बादशाह काठ के पुतले को बख्तर पहनाने की आज्ञा दें तो उनसे कहना कि इसकी परीक्षा काठ के पुतले पर नहीं हो सकेगी।

मैं स्वयं इसको धारण कर लेता हूं। तब अकबर बादशाह अवश्य तुम्हारी प्रार्थना स्वीकार कर लेंगे। किन्तु ध्यान रखना, जैसे ही बख्ता पर तलवार चलाने के लिए वे या कोई और झपटे, वैसे ही तुम एकाएक भयंकर स्थिति उत्पन्न कर देना, ताकि उसका हाथ व्याकुल होकर दूर खड़ा हो जाए। यदि यह कार्य तम भ तो निश्चित रूप से ही तुम्हारे प्राण बच जाएंगे। अकबर पर इसका कारण यह बताना कि मेरे इस बख्तर को पहले का पुतला तो होगा नहीं, कुछ न कुछ तो अवश्य शक्ति रखता वह अपने प्रतिद्वंद्वी को पास ही क्यों फटकने देगा? दैवयोग से पर पास आ भी जाए तो उसे कुछ न कुछ खौफ होगा ही और हम वह आसानी से बख्तर नहीं तोड़ सकेगा।"

बीरबल की बताई हुई तरकीब कारीगर को पसन्द आई। दो-तीन के बाद लोहे का दूसरा बख्तर बनाकर वह अकबर बादशाह के दरबार में गया। अकबर बादशाह ने बख्तर पुनः काठ के पुतले को पहनाने की आज्ञा दी।कारीगर ने बीरबल की बताई हुई बात को दोहराकर अकबर बादशाह से प्रार्थना की कि उसी के बदन पर इस बख्तर की परीक्षा हो। अकबर बादशाह ने उसकी प्रार्थना स्वीकार कर ली और एक चतुर सिपाही की होशियारी से तलवार चलाकर बख्तर की परीक्षा लेने की आज्ञा दी।सिपाही ने जैसे ही तलवार चलाने को उठाई वैसे ही बड़े ज़ोर से कड़ककर कारीगर सिपाही की तरफ लपका।

सिपाही की तलवार उठीकी-उठी रह गई और वह भयभीत होकर दूर जा खड़ा हुआ।अकबर बादशाह ने कारीगर से ऐसा करने का कारण पूछा। कारीगरतो-कारीगर ही था, वह भी बीरबल का सिखाया हुआ, बातों में कैसे चूकता। उसने बीरबल के कथनानुसार ही अकबर बादशाह को जवाब दिया। अकबर बादशाह यह सुनकर बोले-"कारीगर यह बात तो ठीक ही है परन्तु, सचसच बताओ, किसने तुम्हें यह सलाह दी?"तब कारीगर ने सच्ची बात भरे दरबार में कह दी। बीरबल की चतुराई से अकबर बादशाह तथा सभी दरबारी अत्यधिक प्रसन्न हुए। इस प्रकार बीरबल की चतुराई एवं बुद्धि से राजा और प्रजा का भला होता रहा।