बीरबल की चतुराई-अकबर बीरबल की कहानी

Apr 10,2021 01:26 AM posted by Admin

अकबर को बीरबल ने एक बार यह कहावत सुनाई थी कि खाकर लेट जा और मार खाकर भाग जा। यह अच्छे लोगों की पहचान है। जो लोग ऐसा करते हैं, उन्हें ज़िन्दगी में किसी भी प्रकार का दुःख नहीं उठाना पड़ता है। अकबर को अचानक ही बीरबल की यह कहावत याद आ गई। उन्होंने सोचा-"बीरबल अवश्य ही खाना खाने के बाद लेटता होगा। आज हम उसकी इस बात को गलत सिद्ध कर देंगे।" उन्होंने एक नौकर को अपने पास बुलाया और कहा-"तुम बीरबल के पास जाओ, इस समय वह खाना खा रहा होगा। बीरबल से कहना कि हमने याद किया है। वह जिस हालत में हो, हमसे तुरन्त मिले।" बादशाह का आदेश सुनकर नौकर चला गया। जब नौकर बीरबल के यहां पहुंचा तो उसने देखा कि बीरबल खाना खा रहा है। नौकर ने अकबर का आदेश बीरबल को सुना दिया।


बीरबल बुद्धिमान तो था ही, उसने समझ लिया कि अकबर ने उसे क्यों तुरन्त आने के लिए कहा है? इसलिए बीरबल ने भोजन समाप्त करके नौकर, से कहा-"ठहरो! मैं कपड़े बदलकर तुम्हारे साथ ही चलता हूं।"
उस दिन बीरबल चुस्त पाजामा पहनने हेतु वह कुछ देर के लिए बिस्तर पर लेट गया, फिर कपड़े पहनकर वह नौकर के साथ चल दिया।जब बीरबल दरबार में पहुंचा तो अकबर ने कहा-"कहो बीरबल! खाना खाने के बाद आज भी लेटे या नहीं?"बिल्कुल लेटा था बादशाह सलामत!"बीरबल की बात सुनकर अकबर ने क्रोधित स्वर में कहा-"बीरबल! तुमने हमारे हुक्म की अवहेलना की है, हम तुम्हें दण्ड देंगे। जब हमने तुरन्त बुलाया था, फिर तुम लेटे क्यों?""बादशाह सलामत! मैंने आपके हक्म की अवहेलना कहां की है? मैं तो कपड़े पहनकर सीधा आपके पास ही आ रहा हूं। यह चुस्त पाजामा पहनने के लिए ही मुझे लेटना पड़ा था।" बीरबल ने सहज भाव से उत्तर दिया।अकबर बादशाह बीरबल की चालाकी को समझ गए और मुस्कराए बिना न रह सके।