बीरबल फिर प्रकट हआ-अकबर बीरबल की कहानी

Apr 10,2021 01:43 AM posted by Admin

एक दिन बादशाह अकबर एकांत में शांत बैठे किसी विषय पर विचार कर रहे थे। तभी बीरबल ने आकर अकबर बादशाह से कुछ मज़ाक किया। बादशाह उस वक्त मज़ाक के मूड में नहीं थे। इसलिए बीरबल के मज़ाक से वह गुस्सा हो गए और बोले-"बीरबल! तुम आज से मेरे दरबार में मत आना, यहां से चले जाओ।"तब अकबर बादशाह को नाराज़ देखकर बीरबल ने वहां से चुपचाप चले जाना ही उचित समझा। जब एक महीना हो गया, तब भी अकबर बादशाह ने उनको नहीं बुलाया और उनकी जगह एक नया दीवान नियुक्त कर लिया।जब बीरबल को यह समाचार मालूम हुआ तो वह बिना कुछ कहसुने बाहर चला गया और अपने घर वालों को दिल्ली में छोड़ गया। इस प्रकार बीरबल को दीवानी से अलग हुए दो-तीन महीने बीत गए थे। सारा काम नया दीवान अपनी बुद्धि के मुताबिक ठीक तरह से करता था, परन्तु अकबर बादशाह को उस पर संतोष नहीं हुआ। उन्होंने एक योग्य दीवान नियुक्त करने का संकल्प लिया, परन्तु तुरन्त एक योग्य आदमी का मिलना असंभव था, इसलिए उन्होंने सारे देश में यह ऐलान करवा दिया कि जो आदमी दिल्ली-दरबार में पूछे गए सवालों का ठीक-ठीक जवाब देगा, उसे दीवान बना दिया जाएगा।


दीवानी की इच्छा रखने वाले बहुत से व्यक्ति दिल्ली में एकत्रित हुए। दरबारियों को भी उम्मीदवार होने की बादशाह अकबर की तरफ से आज्ञा . थी, मगर जवाब न दे सकने पर हास्य का पात्र बनने के डर से किसी को यह साहस नहीं हुआ।आखिर वह दिन आ गया। सभा में सिवाय दरबारियों के किसी और को आने की आज्ञा नहीं थी। दीवान बनने के लिए केवल पांच उम्मीदवार हाज़िर हुए थे। उनमें से एक गरारेदार पाजामा और ढीला अंगरखा पहने हए था। सिर पर साफा इस तरह बांधे हुए था, जिससे उसकी एक आंख ढकी हुई थी। उसकी लम्बी दाढ़ी, चमकती आंख और चमकदार मुंह से यह मालूम होता था कि यह कोई प्रभावशाली मनुष्य है। उसकी दाढ़ी के बाल आधे काले और आधे सफेद थे।

अब पंडितराज जगन्नाथ ने कहा-"आज की सभा में किए गए सवारी का जो ठीक-ठीक जवाब देगा, वही दीवान बनाया जाएगा, परन्त जिया एक भी जवाब गलत होगा, उससे फिर सवाल नहीं किया जाएगा। पहला प्रश्न है, दुनिया के समुद्रों में मोती की सीपें कितनी होती हैं?"यह सवाल सुनकर चारों उम्मीदवारों में से किसी ने लाख, किसी करोड़, किसी ने अरबों सीपें बतलाईं, परन्तु साफे वाला आदमी बोला"संसार के मनुष्यों की जितनी आंखें हैं, उतनी ही सीपें होती हैं।"यह जवाब सुनकर चारों ओर से वाह-वाह होने लगी। अब पंडित जगन्नाथ ने चारों से पूछना बन्द कर दिया और साफे वाले से दूसरा सवाल पछा"शरीर का पहला गुण क्या है?"अरोग्यता।" साफे वाले बूढ़े ने कहा। इसके पश्चात् नवाब अब्दुल रहीम खानखाना ने पूछा-"सबसे बढ़िया शस्त्र कौन-सा है?". दाढ़ी वाले बूढ़े उम्मीदवार ने कहा-"बुद्धि ही सबसे श्रेष्ठ शस्त्र है।"


राजा टोडरमल ने पूछा-"अगर चीनी और रेत मिल जाए तो जल में डालने के अलावा उनको अलग-अलग करने का और क्या उपाय है?" : "उनको पृथ्वी पर फैला दिया जाए चीनी को चीटियां उठा ले जाएंगी
और रेत पड़ा रह जाएगा।" उम्मीदवार ने जवाब दिया। पानी पी सकोगे?"नवाब खानखाना ने अब पांचवां सवाल किया-"क्या तुम समुद्र का"आप समुद्र में गिरने वाली सब नदियों का उसमें जाना बंद कर दें तो पी सकता हूं।" दाढ़ी वाले ने जवाब दिया। पंडित जगन्नाथ ने छठा सवाल किया-"चिता के बिना आदमी किससे जलता है?"साफे वाले उम्मीदवार ने जवाब में कहा-"चिंता से।" "सबसे नाच उद्यम क्या है?" टोडरमल ने सातवां सवाल किया।उम्मीदवार बोला-"भिक्षा का।" ऐसे उत्तर सुनकर सभी लोग हैरान रह गए और उसकी प्रशंसा करने लगे।"यदि उपस्थित सभासदों में से कोई भी मेरे एक सवाल का जवान दे देगा, तो मैं उसकी बहुत कृपा मानूंगा।" साफे वाले बूढ़े ने कहा यह सुनकर सभी दरबारी बोल उठे-"खुशी से पूछिए।"

"किवाड़ के खोलने तथा बंद करने के समय जो 'चूं-चूं' का शब्द होता है, उसका क्या अर्थ है?" कोई भी इस सवाल का जवाब नहीं दे सका। अकबर बादशाह उसकी बुद्धि से बहुत खुश हुए और मन में यह मान लिया कि उन्हें बीरबल के समान योग्य दीवान मिल गया है।फिर अकबर बादशाह ने कहा-"मैंने बीरबल को निकाल दिया, वह न जाने किधर चला गया? मैंने उसको बहत खोजा, परन्तु उसका कहीं पता नहीं चला इसलिए मुझे दूसरा योग्य दीवान ढूंढने की ज़रूरत पड़ी। यदि मुझे यह पता होता कि बीरबल कहां है तो मैं उसको बुलवाने का अवश्य प्रयत्न करता।" "हुजूर! अगर आपने उसको ढूंढने के लिए सच्चे दिल से परिश्रम किया होता तो वह अवश्य मिलता।" नए दीवान ने नम्रता के साथ कहा।


अकबर बादशाह बोले-"नहीं, जहां तक मुझसे हो सका, मैंने उसको ढूंढने में कोई कसर नहीं छोड़ी। जब किसी तरह भी नहीं मिला, तब नए और बुद्धिमान दीवान को खोजने के लिए लाचार हुआ।"
"जहांपनाह! अब यदि वह आपसे आ मिले तो आप उसको रखेंगे या नहीं?" नए दीवान ने पूछा। अकबर बादशाह बोले-"हां, अवश्य रखूगा। मैं तो उसको बुलाने के लिए बड़ा बेचैन हो रहा हूं।" "उसका पता-ठिकाना मैं जानता हूं।" नए दीवान ने कहा।इस पर अकबर बादशाह बोले-"यदि तुम उनका पता-ठिकाना बता दोगे तो मैं तुम्हारा बहुत आभारी रहूंगा।"इस तरह नए दीवान ने भली-भांति जान लिया था कि अकबर बादशाह को बीरबल को प्राप्त करने की प्रबल इच्छा है। इसलिए उसने अकबर को प्रसन्न करने के लिए अपना साफा ऊंचा उठाकर अपनी ढकी हुई आंख बाहर निकाली। ढीला अंगरखा और गरारेदार पाजामा उतारकर अलग फेंक दिया। दाढ़ी खींचकर दूर कर दी और बीरबल के रूप में प्रकट हो गया।


बीरबल को देखकर सब लोग बहुत खुश हुए। अकबर बादशाह के आनंद का ठिकाना नहीं रहा। चारों ओर से वाह-वाह की आवाजें आने लगीं। अकबर बादशाह के पूछने पर बीरबल बोला-"आपके पास से चले जाने के पश्चात् एक माह तक घर में छिपकर बैठा रहा। कभी-कभी रात में और कभी-कभी दिन में भेष बदलकर बाहर निकला करता था। रात के समय प्रायः मैं चोरों को पकड़ा करता था, परन्तु मुझ को कोई नहीं पहचान सका। जब मुझको यह विश्वास हो गया कि मेरे गुप्त भेष में नहीं पहचान सकता, तब मैं दरबार में आने लगा और यहां का रंग-ढंग की देखने लगा। इस तरह करते-करते यहां आ पहुंचा।"वृत्तांत सुनकर अकबर बादशाह बहुत खुश हुए। जो वस्त्र ना के लिए मंगवाए थे, बीरबल को देकर उन्हें फिर से पद पर निय दिया। बीरबल के फिर पद पर आने से प्रजा ने भी राहत की साँस ली|