भगवान की बैटरी-अकबर बीरबल की कहानी

Apr 09,2021 06:46 AM posted by Admin

बुढ़ापे के दिन में बीरबल और उसकी पत्नी यमुना नदी के किनारे पर अपना घर बना कर रह रहे थे। बादशाह से मिली हुई ज़मीन में वह हर वर्ष कुछ न कुछ बीज देता था। एक वर्ष उसने मक्की की फसल बोई। फसल भी बहुत अच्छी हुई। परन्तु परमात्मा के आगे किसका ज़ोर चलता है। एक रात बड़ी ज़ोर से बारिश होने लगी तथा बर्फ गिरने लगी। उनकी सारी फसल ख़राब हो गई परन्तु बारिश तो थमने का नाम ही नहीं ले रही थी। यह सब देख कर बीरबल की पत्नी बहुत दुःखी हुई, बाहर खड़े बीरबल से कहने लगी-बीरबल देखो. अभी भी किस तरह से बिजली चमक रही है। यह बिजली नहीं चमक रही। बीरबल ने कहा। यह तो भगवान बैटरी मारकर देख रहे हैं कि कोई जगह तो नहीं बच गई।