अंगूठी-अकबर बीरबल की कहानी

Apr 10,2021 12:46 AM posted by Admin

एक बार कुछ दरबारियों ने बादशाह के पास बीरबल की शिकायत की। "साहिब, आजकल बीरबल को ज्योतिष का बड़ा शौक हो गया है। वह कहता है कि मैं मन्त्रों के साथ कुछ भी कर सकता हूँ। हाँ महाराजकुछ दरबारी भी कहने लगे-अब वह दरबार के काम पर ध्यान नहीं देता हम उसको कह नहीं सकते, क्योंकि हमें उन मन्त्रों से डर लगता है। कहीं हमारे ऊपर जादू-मन्त्र न कर दे।"
बादशाह ने कहा-अच्छा, हम उसको परखते हैं। बीरबल के मन्त्रों में कितना दम है? यह कह कर बादशाह ने एक दरबारी को कहा-तुम अपनी अंगूठी छुपा लो। आज इसी के बारे में पूछेगे। तभी उसी समय बीरबल ने दरबार में आकर बादशाह को प्रणाम किया और वह अपनी जगह पर बैठ गया।


बीरबल के बैठते ही बादशाह ने कहा-"बीरबल, अभी-अभी मेरी अंगूठी गुम हो गई है, तुम पता करो। मैंने सुना है तुम जादू-मन्त्रों के साथ कुछ भी कर सकते हो। बीरबल ने शंका भरी आँखों के साथ सब दरबारियों की तरफ देखा और वह समझ गये कि उसके खिलाफ बादशाह के कान अच्छी तरह भरे गए हैं। बीरबल ने कुछ सोचकर एक कागज़ पर टेढीमेढ़ी लकीरें खींच कर कहा-साहिब, आप इस पर हाथ रखें, अंगूठी जहाँ पर भी होगी, आपकी अंगुली में आ जायेगी।" बादशाह ने उस कागज़ के ऊपर हाथ रख दिया। फिर बीरबल ने अपने हाथ में चावल के दाने लेकर सब दरबारियों के ऊपर फेंकने शुरू कर दिये। जिसके पास अंगूठी थी। वह सोचने लगा-कहीं सच-मुच अंगूठी निकल कर बादशाह के पास न पहुंच जाये। उसने ज़ोर से जेब पर हाथ रख दिया। बीरबल यह सब गहरी आँखों से देख रहा था। बीरबल बोला-साहिब, अंगूठी तो मिल गई है लेकिन एक दरबारी ने जोर से उसे पकड़ रखा है। बादशाह बीरबल का इशारा समझ कर हंस पड़े और अंगूठी बीरबल को इनाम में दे दी। चुगली करने वाले दरबारियों के सिर शर्म के मारे झुक गए।