अक्ल का घड़ा-अकबर बीरबल की कहानी

Apr 10,2021 03:36 AM posted by Admin

एक दिन की बात है कि बादशाह अकबर के दरबार में का एक दूत पहुंचा। उसने बादशाह अकबर से एक नई तरह करते हुए कहा-"आलमपनाह! आपके दरबार में एक से न अक्लमंद, होशियार तथा बहादुर दरबारी विद्यमान हैं। हमारे महाराज पास मुझे घड़ा भर अक्ल लाने हेतु भेजा है। हमारे महाराज को भी परा भरोसा है कि आप उसका बंदोबस्त किसी-न-किसी तरह और ही कर देंगे।" हैरानीजनक बात सुनकर बादशाह अकबर चकरा गए।उन्होंने अपने मन में सोचा-"उन्होंने भी क्या बेतुकी मांग की है, भला घड़े भर अक्ल का बंदोबस्त कैसे किया जा सकता है? लगता है कि लंका का राजा हमारा मजाक उड़ाना चाहता है।"इस समय बादशाह को बीरबल का ध्यान आया, लेकिन सोचने लगे कि शायद यह कार्य बीरबल के वश का भी न हो, मगर फिर भी उसे बताने में बुराई ही क्या है? जब बीरबल को बादशाह के बुलवाने का कारण ज्ञात हुआ तो वह मुस्कराते हुए कहने लगे-"आलमपनाह ! चिंता की कोई बात नहीं, अक्ल की व्यवस्था हो जाएगी, लेकिन इसमें कुछ सप्ताह का समय लग सकता है।"


बादशाह अकबर बीरबल की इस बात पर कहते भी तो क्या, बीरबल को मुंह मांगा समय दे दिया गया। बीरबल ने उसी दिन शाम को अपने एक खास नौकर को आदेश दिया-"छोटे मुंह वाले कुछ मिट्टी के घड़ों की व्यवस्था करो।" नौकर ने तुरन्त बीरबल की आज्ञा का पालन किया। . उन घड़ों के आते ही बीरबल अपने नौकर को लेकर कद्दू की बल तक गए। उन्होंने नौकर से एक घड़ा ले लिया, बीरबल ने घड़े को एक कद्दू के फूल पर उल्टा लटका दिया, इसके बाद उन्होंने सेवक की आदत दिया कि बाकी सारे घड़ों को इसी प्रकार कह के फलों पर उल्टा लटका दें। अब बीरबल ने सेवक को उन घड़ों की देखभाल सावधानीपूर्वक करा रहने का हुक्म दिया तथा खुद वहां से चले गए।

बादशाह अकबर ने मोहलत का समय बीत जाने पर बीरबल से अक्ल के घड़ों की स्थिति जाननी चाही, तो बीरबल ने तुरन्त उत्तर दिया"आलमपनाह ! बस कार्य हो चुका समझें, बस दो सप्ताह का समय और चाहिए, उसके बाद पूरा घड़ा अक्ल से लबालब भर जाएगा।"बीरबल ने पंद्रह दिन के बाद घड़ों के स्थान पर जाकर देखा कि कह के पौधे घड़े जितने बड़े हो गए हैं, उन्होंने नौकर की प्रशंसा करते हए कहा-"तुमने अपनी जिम्मेदारी बड़ी कुशलतापूर्वक निभाई है, इसके लिए हम तुम्हें भारी इनाम देंगे।"इसके बाद बीरबल ने लंका के दूत को बादशाह अकबर के. दरबार में बुलवाया और उसे बताया कि घड़ा भर अक्ल लगभग तैयार है। लंका के दूत के आने पर बीरबल ने तुरन्त ताली बजाई, ताली की आवाज़ सुनते ही बीरबल का सेवक एक बड़ी थाली में घड़ा लिए हुए बड़ी शान से दरबार में हाजिर हुआ।बीरबल ने घड़ा उठाया और उसे लंका के दूत के हाथ में सौंपते हुए कहा-"लीजिए श्रीमान! आप इसे अपने महाराज को भेंट कर दीजिए, लेकिन एक बात अवश्य ध्यान रहे कि खाली होने पर हमारा यह कीमती बर्तन हमें जैसे-का-तैसा वापिस मिल जाना चाहिए। इसमें रखा अक्ल का फल भी तभी प्रभावशाली साबित होगा, जब इसे किसी भी तरह का नुक्सान न पहुंचे।"


इस पर दूत ने बीरबल से पूछा-"हुजूर! क्या मैं इस अक्ल के फल को देख सकता हूं?" "हां...हां...ज़रूर...।" बीरबल ने अपनी गर्दन हिलाते हए कहा-"और हां, अगर आपके राजा को कुछ और अक्ल की आवश्यकता पड़े तो ऐसे पांच घड़े हमारे पास तैयार रखे हैं।"हैरान होते हए दूत ने मन-ही-मन सोचा-"हमारी भी मति मारी गई है। भला हमें भी क्या सूझी, बीरबल का तो कोई जवाब नहीं है।"
इस प्रकार घड़ा लेकर दूत के जाते ही बादशाह अकबर भी अपनी उत्सुकता को न दबा सके। वह तुरन्त कह उठे-"बीरबल! अक्ल का फल हमें भी दिखाओ न, अभी-अभी तुम कह रहे थे कि ऐसे पांच घड़े और भी रखे हैं?""अभी मंगाए देता हूं आलमपनाह!" बीरबल ने उत्तर दिया।बादशाह के कहते ही घड़ा मंगवा लिया गया, जैसे ही उन्होंने घडे झांका तो उन्होंने उसमें पूरा-का-पूरा कद्दू फिट पाया। यह देखते ही बादशाह को हंसी आ गई। वह बीरबल की पीठ ठोंकते हुए कहने लगे-"मान गए भई! तुमने भी अक्ल का क्या शानदार फल पेश किया है, लगता है इसे पाकर लंका के राजा को हमारे बुद्धिमान होने में तनिक भी देर नहीं लगेगी।"