आधी धूप और आधी छाया-अकबर बीरबल की कहानी

Apr 09,2021 06:58 AM posted by Admin

एक दिन की बात है कि बादशाह अकबर ने बीरबल से नाराज़ हो कर उसे शहर से बाहर निकाल दिया। बीरबल हर हालत में खुश रहने वाला था। वह शहर से बाहर एक गाँव में रहने लगा। जब बीरबल को शहर से निकले दो-तीन महीने हुए तो बादशाह को उसकी चिंता होने लगी। बादशाह ने बीरबल को ढूंढने की बहुत कोशिश की, परन्तु सफल न हुए। उनको तो यह भी नहीं पता लग सका कि बीरबल कौन से गाँव में है। बाद में बादशाह ने बीरबल को ढूंढने की एक योजना बनाई। उन्होंने अपने राज्य में ऐलान करवाया कि जो आदमी आधी धूप और आधी छाया लेकर मेरे पास आएगा, उसको हज़ार अशरफियाँ इनाम में दी जाएंगी। जब यह ख़बर बीरबल के कानों में पड़ी तो बीरबल ने उस गाँव में एक आदमी से कहा कि मेरे दोस्त, तुमने मेरी बहुत सेवा की है।

आज मैं तेरी मद्द करना चाहता हूं। मैं तुम्हें जैसे समझाऊंगा तू वैसा ही करना और बादशाह से हज़ार अशरफियाँ लेकर अपनी गरीबी को दूर कर लेना। बीरबल के मुँह से यह बात सुन कर वह मुस्कराया और कहने लगा-जनाब, बादशाह के पास से कई लोगों ने इनाम लेने की कोशिश की परन्तु सब नाकाम रहे। उल्टे बादशाह ने उन्हें कैद खाने में बन्द कर दिया, क्योंकि कोई भी आदमी आधी धूप और आधी छाया लेकर नहीं पहुंचा। इस बात का जवाब तो उनका वज़ीर ही दे सकता है, जो कि आज कल उनके पास नहीं है और आप मुझे इनाम लेकर आने को कह रहे हो। बीरबल ने उस गरीब आदमी की सारी बात सुन कर उसको बताया कि मैं ही बीरबल हूँ। इसीलिए मैं तुझे जिस तरह से कहूँ तू वैसा ही करना और बादशाह से इनाम ले आना। बीरबल ने उसे समझाया कि एक चारपाई अपने सिर पर रख कर बादशाह के पास दोपहर में जाना और कहना कि महाराज! मैं 'आधी धूप और आधी छाया' लेकर आया हूँ इसलिए मुझे इनाम मिलना चाहिए। उस गरीब व्यक्ति ने बीरबल के कहे मुताबिक सिर पर चारपाई रख कर दोपहर के समय बादशाह के पास जा कर कहामहाराज, मैं आधी दूर धूप और आधी दूर छाया में आया हूँ। इसलिए मैं इनाम का हकदार हूँ और मुझे इनाम दिया जाए।


पहले तो बादशाह उसको देख कर मुस्कराए और फिर एक हज़ार सोने की मुद्राएँ इनाम में देकर उसको बड़े प्यार से अपने पास बिठाया और कहा-देख भाई, तुम्हारा इनाम तो हमने तुझे दे दिया, लेकिन मुझे सच-सच बताओ कि तुम्हें इस प्रकार करने के लिए किसने कहा?उस आदमी ने बादशाह को सब कुछ सच-सच बता दिया।बादशाह उससे बीरबल का नाम सुन कर बहुत खुश हुआ और फिर आप जा कर बीरबल को मना कर वापिस दरबार में ले आया। इस प्रकार बादशाह की तरकीब कामयाब हुई।