अहमद फ़राज़ की शायरी – Ahmad Faraz Shayari

Oct 27,2021 10:01 AM posted by Admin

Ahmad Faraz Shayari: दोस्तों यहाँ पर अहमद फ़राज़ की शायरी का संग्रह किया है, इनकी शायरी अरमान शायरी, अश्क़ शायरी, एटीट्यूड शायरी, बेवफा शायरी, दर्द शायरी, दिल शायरी, दुआ शायरी, फनी शायरी, ग़म शायरी, नफरत शायरी, हर्ट टचिंग लाइन, इंतज़ार शायरी, ख़ुशी शायरी, लव शायरी, रोमांटिक शायरी, सैड शायरी, शिक़वा शायरी, तन्हाई शायरी और दो लाइन शायरी पर आधारित है -

अहमद फ़राज़ की शायरी – Ahmad Faraz Shayari

अहमद फ़राज़ की तन्हाई शायरी  - Ahmad Faraz Alone Shayari In Hindi

अकेले तो हम पहले भी जी रहे थे,
क्यूँ तन्हा से हो गए हैं तेरे जाने के बाद
बस यही आदत उसकी मुझे अच्छी लगती है,
उदास कर के मुझे भी वो खुश नहीं रहता..

कौन देता है उम्र भर का सहारा,
लोग तो जनाज़े में भी कंधे बदलते रहते हैं..
एक पल जो तुझे भूलने का सोचता हूँ,
मेरी साँसें मेरी तकदीर से उलझ जाती हैं..

किताबों से दलीलें दूं या खुद को सामने रख दूं,
वो मुझ से पूछ बैठी हैं मुहब्बत किसको कहते हैं..

अहमद फ़राज़ की दीवानगी शायरी  - Ahmad Faraz Craven Shayari In Hindi

मैं दीवाना सही पर बात सुन ऐ हमनशीं मेरी
कि सबसे हाले-दिल कहता फिरूँ आदत नहीं मेरी
तअम्मुल क़त्ल में तुझको मुझे मरने की जल्दी थी
ख़ता दोनों की है उसमें, कहीं तेरी कहीं मेरी

मुझको मालूम नहीं हुस्न की तारीफ,
मेरी नज़रों में हसीन वो है जो तुझ जैसा हो.

माना कि तुम गुफ़्तगू के फन में माहिर हो,
वफ़ा के लफ्ज़ पे अटको तो हमें याद कर लेना.

भला क्यों रोकता है मुझको नासेह गिर्य करने से
कि चश्मे-तर मेरा है, दिल मेरा है, आस्तीं मेरी

अहमद फ़राज़ की बेवफाई शायरी  - Ahmad Faraz Bewafa Shayari In Hindi

फिर इतने मायूस क्यूँ हो उसकी बेवफाई पर,
तुम खुद ही तो कहते थे की वो सब से जुदा है..

मुझे दुनिया के ग़म और फ़िक्र उक़बा की
तुझे नासेह चलो झगड़ा चुकाएँ आसमाँ तेरा
ज़मीं मेरी उसे तेरी इबादतों पे यकीन है नहीं,
जिस की ख़ुशियां तू रब से रो रो के मांगता है..

नाकाम थीं मेरी सब कोशिशें उस को मनाने की,
पता नहीं कहाँ से सीखीं जालिम ने अदाएं रूठ जाने की.

अहमद फ़राज़ की मुहब्बत शायरी  - Ahmad Faraz Love Shayari In Hindi

मैं सब कुछ देखते क्यों आ गया दामे-मुहब्बत में
चलो दिल हो गया था यार का,
आंखें तो थीं मेरी हम अपनी रूह तेरे जिस्म में छोड़ आए,
तुझे गले से लगाना तो एक बहाना था..

‘फ़राज़’ ऐसी ग़ज़ल पहले कभी मैंने न लिक्खी थी
मुझे ख़ुद पढ़के लगता है कि ये काविश4 नहीं मेरी
कभी कभी तो रो पड़ती हैं यूँ ही आँखें,
उदास होने का कोई सबब नहीं होता..

उस शख्स से बस इतना सा ताल्लुक़ है,
वो परेशां हो तो हमें नींद नहीं आती.

कभी जो हर रोज़ मिला करते थे,
वो चेहरे तो अब ख़ाब ओ ख़याल हो गए

रूठ जाने की अदा हम को भी आती है,
काश होता कोई हम को भी मनाने वाला..

अहमद फ़राज़ की हर्ट टचिंग शायरी  - Ahmad Faraz Hart Touching Shayari In Hindi

तू भी तो आईने की तरह बेवफ़ा निकला,
जो सामने आया उसी का हो गया..

तुम्हारी दुनिया में हम जैसे हजारों हैं,
हम ही पागल थे जो तुम्हे पा के इतराने लगे..

कसूर नहीं इसमें कुछ भी उनका,
हमारी चाहत ही इतनी थी की उन्हें गुरूर आ गया..

अहमद फ़राज़ की ग़म शायरी  - Ahmad Faraz Shayari In Hindi

वो रोज़ देखता है डूबे हुए सूरज को,
काश मैं भी किसी शाम का मंज़र होता...

वो शख्स जो कहता था तू न मिला तो मर जाऊंगा,
वो आज भी जिंदा है यही बात किसी और से कहने के लिए..

अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख्वाबो में मिले
जिस तरह सूखे हुए फूल किताबो में मिले....