कुंदन लाल सहगल का जीवन परिचय (जीवनी) | Kundan Lal Saigal Biography in Hindi

Kundan Lal Saigal Biography in Hindi: जिस इन्सान ने कभी अपने जीवन में सही तरीके से संगीत नही सीखा हो, जीवन चलाने के लिए जो लोगो के कपड़ो की गाँठ पीठ पर लादे फिरता रहा हो, और कभी रेलवे में मामूली नौकरी की वही इन्सान (कुंदन लाल सहगल Kundan Lal Saigal ) आगे चलकर हिंदी फिल्म संगीत को शिखर तक पहुचाया | आइये आज हम आपको फ़िल्मी गायकी के उस महान शिखर पुरुष की जीवनी के बारे में बताते हो-

कुंदनलाल सैहगल की जीवन परिचय (जीवनी) | Kundan Lal Saigal Biography in Hindi

Kundan Lal Saigal का जन्म 4 अप्रैल 1904 को जम्मू में हुआ था | लेकिन इनके पिता अमरचंद सहगल जम्मू कश्मीर (Jammu and Kashmir) राज्य में तहसीलदार (Tehsildar) थे | नौकरी से छुटी लेने के बाद वे जालन्धर में रहने लगे और फिर पंजपीर गेट के पास उन्होंने अपना मकान बनवा लिया था | और इस जगह को अब “सैहगल मोहल्ला” के नाम से जाना जाता है | पिता की अपेक्षा सैहगल की माँ (केसरबाई सैगल) उनके प्रति अधिक दयालु थी |

पूरा नाम ( Name ) कुंदनलाल सहगल ( Kundan Lal Saigal )
पिता का नाम ( Father Name) अमरचंद सहगल ( Amarchand Saigal )
माता का नाम ( Mother Name) केसरबाई सहगल ( Kesarbai Saigal )
जन्म ( Born ) 11 April 1904
जन्म स्थान ( Born  Place ) Jammu and Kashmir
मृत्यु ( Died ) 18 January 1947 (aged 42)
मृत्यु स्थान ( Died Place ) Jalandhar, Punjab

कुंदनलाल सहगल ( Kundan Lal Saigal) का पढने में अधिक रूचि नहीं था | कुंदन अपने स्कूल से हमेशा भाग जाते थे और किसी एक शांत जगह बैठकर दिवास्वप्न में खो जाते थे | स्कूल की पढाई कुंदनलाल सहगल लिए भार समान थी | पिता इसी बात को लेकर बहुत ज्यादा चिंतित रहते कि आगे चलकर यह लड़का क्या करेगा | बचपन से ही सहगल का अभिनय में बहुत रूचि थी | 10 साल की आयु में उसने जम्मू में होने वाली रामलीला में सीता का पार्ट करना आरम्भ कर दिया | वह बहुत धीमी आवाज में संवाद बोलते थे |

रावण की भूमिका करने वाला अभिनेता सुनील रैना जब सीता सहगल का वनवास में अपहरण करता तो कुंदन के मुंह से पूरी चीख भी नही निकलती थी | पढाई में मन न लगने के कारण कुंदन को तो हर साल अक्टूबर के महीने में होने वाली रामलीला का इन्तजार रहता था | इन्ही दिनों संगीत में भी उसकी रूचि हुई थी | वह हमेशा एकांत में बैठकर गुनगुनाता रहता था | घर में बैठकर गुनगुनाने में ही सारा दिन बिता देने वाले कुंदनलाल की इस आदत से उसके पिता को नारजगी होती थी |

अंत में कुंदनलाल ( Kundan Lal Saigal ) ने संगीत को अपने जीवन का अपने जीवन का लक्ष्य बनाकर घर को त्याग दिया | उस जमाने में All India Radio के डायरेक्टर सैयद अली बुखारी सैगल के अन्तरंग मित्र थे | उन्होंने बाद में बताया कि घर छोड़ देने के बाद भी सैगल अपनी माता को पत्र लिखकर उन्हें अपनी कामो की जानकारी देते रहते थे लेकिन उन्होंने माता को भी अपना पता नही बताया था | कुछ समय तक उन्होंने रेमिंगटन टाइपराइटर कम्पनी में सेल्समैन का काम किया, फिर उन्होंने बाद में रेलवे में भी नौकरी की | जहा अंग्रेज स्टेशन मास्टर की पत्नी उनके प्रति प्रेम रखती थी | इस अंग्रेज महिला ने सैगल को अंग्रेजी सिखाई तथा शाशको की भाषा का पूरा अभ्यास कराया |

बाद में कठिन परिश्रम के बाद 1932 में सैगल “मोहब्बत के आंसू”, “सुबह का सितारा ” तथा “जिन्दा लाश” इन तीन फिल्मो में दिखाई पड़े | 1933 में उन्होंने “यहूदी की लडकी ” तथा “कारवाने हयात” में काम किया | उनके अभिनय तथा गायन का चमत्कारी प्रभाव लोगो ने बहुत पसंद किया | 1934 में उनकी 3 फिल्मे रिलीज़ हुयी “चण्डीदास” डाकू मंसूर और “रूप लेखा” | सैगल ने 1935 में लोगो के दिलो में बस जाने वाली फ़िल्म “देवदास” की ये फ़िल्म बांगला और हिंदी दोनों भाषा में बनी |

कलकत्ता से चलकर 1941 में सैगल फिल्म राजधानी मुम्बई पहुचे | यहा भी रजतपट संसार ने उनका दिल खोलकर स्वागत किया | मुम्बई को रणजीत मूवीटन में वे गायक अभिनेता के रूप में रहे और “भक्त सूरदास” , “तानसेन”, “भंवरा” , “कुरुक्षेत्र”, “शाहजहा” आदि फिल्मो में उनके गीत काफी लोकप्रिय हुए | उन्होंने इस लोगो की इस बात को गलत साबित का दिया कि केवल चेहरे की खूबसूरती ही अभिनय की सफलता का कारण बनती है | 

Kundan Lal Saigal सहगल जी शराब बहुत पीते थे जिसकी वजह से अपना स्वास्थ्य शरीर नष्ट कर लिया था जिससे वह ज्यादा दिन जीवित नहीं रह सके रहते | उनका स्वास्थ्य पहले भी अच्छा नही था | पहले से उनको मधुमेह और जिगर रोग था, जिसकी वजह से वह और भी ज्यादा कमजोर हो गए |  1946 में जब शाहजहा की भूमिका करते हुए उन्होंने पत्नी मुमताज के वियोग से दुखी इस बादशाह की अंतर्वेदना को “अब जीकर क्या करेंगे , जब दिल ही टूट गया” के स्वर में मुखरित किया तो यह लगा कि यह पीड़ा और निराशा खुद गायक की है | बाद में 18 January 1947 यानि 42 साल की उम्र में वह दुनिया छोड़कर इ गए |

 
Top