गुरु गोबिंद सिंह जी की जीवनी Guru Gobind Singh Ji History in Hindi

गुरु गोबिन्द सिंह का जन्म 05 जनवरी 1666 में हुआ था ये सिखों के दसवें धार्मिक गुरु, योद्धा और कवी थे। उनकी शिक्षा से ही अन्य सिक्ख समुदाय गुरूद्वारा जाकर प्रार्थना करते है व गुरुवाणी पढ़ते है। गुरु गोविन्द सिंह जी का सिख समुदाय के विकास में बहुत बड़ा हाथ है। सिर्फ 9 वर्ष की आयु में गुरु गोबिन्द सिंह सिक्खों के नेता बने एवं अंतिम सिक्ख गुरु बने रहे।

गुरु गोबिंद सिंह जी की जीवनी Guru Gobind Singh Ji History in Hindi

गुरु गोबिंद सिंह जी की जीवनी Guru Gobind Singh Ji Biography History in Hindi


जब गुरु गोबिन्द सिंह पैदा हुए थे उस समय उनके पिता असम में धर्म उपदेश को गये थे। उनके बचपन का नाम गोविन्द राय था। गुरु गोबिन्द सिंह का जन्म पटना में जिस घर में हुआ था और जिसमें उन्होने अपने प्रथम चार वर्ष बिताये थे, वहीं पर अब तखत श्री पटना साहिब स्थित है। उन्होंने सैन्य लोकाचार को शुरू किया जिसमें कुछ पुरुष सिखों को हर समय तलवारों  को साथ रखने को कहा गया। सिख समुदाय में वे आखरी सिख गुरु थे और उन्हें इसी वजह से परम गुरु, गुरु ग्रन्थ साहिब (Guru Granth Sahib) के नाम से जाना जाता है।

जन्म नाम गोबिंद राय सोधी
जन्म 5 January, 1666, पटना साहिब, भारत
माता पिता माता गुजरी, गुरु तेग बहादुर
पूर्ववर्ती गुरु गुरु तेग बहादुर
उत्तराधिकारी गुरु गुरु ग्रन्थ साहिब
पत्नियों के नाम माता जीतो, माता सुंदरी, माता साहिब देवन
बच्चों के नाम अजित सिंह, जुझार सिंह, जोरावर सिंह, फ़तेह सिंह
मृत्यु 7 अक्टूबर, 1708 हजुर साहिब नांदेड, भारत

1670 में अपने परिवार के साथ पंजाब वापस लौट आये। उसके बाद मार्च 1672 में वे चक्क ननकी चले गए जो की हिमालय की निचली घाटी में स्तिथ है। वहां उन्होंने अपनी शिक्षा ली। अपनी मृत्यु से पहले ही तेग बहादुर ने गुरु गोबिंद जी को अपना उत्तराधिकारी नाम घोषित कर दिया था। बाद में मार्च 29, 1676 में गोबिंद सिंह 10वें सिख गुरु बन गए। यमुना नदी के किनारे एक शिविर में रह कर गुरु गोबिंद जी ने मार्शल आर्ट्स, शिकार, साहित्य और भाषाएँ जैसे संस्कृत, फारसी, मुग़ल, पंजाबी, तथा ब्रज भाषा भी सीखीं।

गुरु गोबिन्द सिंह के तिन विवाह- Three marriages of Guru Gobind Singh


  • पहला विवाह माता जीतो से 21 जून 1677 को आनंदपुर से 10 किलोमीटर दूर उत्तर में बसंतगढ़ में हुआ।
    इनसे इनके तिन पुत्र जुझार सिंह, जोरावर सिंह और फ़तेह सिंह थे।
  • दूसरा विवाह उन्होंने 4 अप्रैल 1684 में माता सुंदरी से आनंदपुर में किया।
    इनसे इनका एक पुत्र अजित सिंह था।
  • 15 अप्रैल 1700 को आनंदपुर में माता साहिब देवन से उनका तीसरा विवाह हुआ।

गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा योद्धा के लिए कुछ नियम – Some rules for Khalsa Warrior


  • वे कभी भी तंबाकू नहीं उपयोग कर सकते।
  • बलि दिया हुआ मांस नहीं खा सकते।
  • किसी भी मुस्लिम के साथ किसी भी प्रकार का सम्बन्ध नहीं बना सकते।
  • उन लोगों से कभी भी बात ना करें जो उनके उत्तराधिकारी के प्रतिद्वंद्वी हैं।

गुरु गोबिंद सिंह द्वारा लड़ाई किये हुए कुछ मुख्य युद्ध Guru Gobind Singh Ji Fights


गुरु गोबिंद सिंह नें कुल चौदह युद्ध लढाई किया परन्तु कभी भी किसी पूजा के स्थल के लोगों को ना ही बंदी बनाया या क्षतिग्रस्त किया।

  • भंगानी का युद्ध Battle of Bhangani (1688)
  • नादौन का युद्ध Battle of Nadaun (1691)
  • गुलेर का युद्ध Battle of Guler (1696)
  • आनंदपुर का पहला युद्ध First Battle of Anandpur (1700)
  • अनंस्पुर साहिब का युद्ध Battle of Anandpur Sahib (1701)
  • निर्मोहगढ़ का युद्ध Battle of Nirmohgarh (1702)
  • बसोली का युद्ध Battle of Basoli (1702)
  • आनंदपुर का युद्ध Battle of Anandpur (1704)
  • सरसा का युद्ध Battle of Sarsa (1704)
  • चमकौर का युद्ध Battle of Chamkaur (1704)
  • मुक्तसर का युद्ध Battle of Muktsar (1705)

गुरु गोबिंद सिंह जी की मृत्यु कब हुई थी? Shri Guru Gobind Singh Ji Death


सेनापति श्री गुर सोभा के अनुसार गुरु गोबिंद सिंह के दिल के ऊपर एक गहरी चोट लग गयी थी। जिसके कारण 7 अक्टूबर, 1708 को उन्होंने अपने शरीर को त्याग दिया।